संपादकीय

हमारा देश “विविधता में एकता” का सबसे बड़ा उदाहरण है। यहाँ अलग-अलग जाती, धर्म, रीति – रिवाज़, संस्कृति, परंपरा और प्रथाओ को मानने वाले तथा भिन्न – -भिन्न भाषाओ को बोलने वाले लोग बिना किसी भेदभाव के रहते है , एक – दूसरे की मान्यताओ का सम्मान करते है और उनकी समझ भी रखते है।
भारत हज़ारो सालो से सहिष्णुता दीखता आ रहा है। वह अपने ऊपर हुए मुगलकालीन अत्याचारो जैसे – मुसलमानो द्वारा हिन्दुओ के साथ मारकाट मचाना, जजिया थोपना, हिन्दू धार्मिक स्थलों को नष्ट करना, हिन्दू स्त्रिकयों के साथ बलात्कार आदि सभी को कब का भुला चूका है और “जियो और जीने दो ” के सिद्धांत को अपनाकर निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।

  • Tolerant India vs. Intolerant India: The Manufactured Debate
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