राष्ट्रवाद

ऐसे ही एक महान समाजिक व धार्मिक सुधरक जिन्होंने न केवल हिंदु समाज में उस समय प्रचलित कुरीतिओं के विरूद्ध आवाज उठाई अपितु वैदिक शिक्षा व ज्ञान का प्रचार कर राष्ट्रीयता की भावना का भी संचार किया। जी हाँ, महर्षि स्वामीदयनन्द सरस्वती जिन्होने 1975 में आर्य समाज की स्थापना कर हिंदु समाज को एक नई दिशा प्रदान की।
स्वामीदयनन्द एकमात्र ऐसे समाज सुधारक थे, जिन पर विदेशी शिक्षा का कोई प्रभाव नहीं था। देश भ्रमण के दौरान उन्होंने भारतीय संस्कृति व सभ्यता के गौरव व महत्व को समझा व उसे जन-जन तक पहुँचाने का कार्य किया।
उनके अनुसार राष्ट्र की परिभाषा, ‘एक ऐसे जन समूह के रूप की जा सकती है जोकि एक निश्चित भौगोलिक सीमाओं में एक निश्चित देश में रहता हो, जिसकी अपनी ऐतिहासिक पहचान हो, एक खास संस्कृति हो, एक समान भाषा हो व खुद का राज अर्थात स्वराज हो।’

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