रानी पद्मिनी स्त्री गौरव और शक्ति की प्रतीक, अभिव्यक्ति की आज़दी के नाम पर उनसे खिलवाड़ बंद हो

रानी पद्मिनी का उल्लेख कहाँ – कहाँ मिलता है, इस पर चर्चा करने से पहले चित्तौड़ के किले का उल्लेख अनिवार्य है. चित्तोड़ के किले का एक दौरा ही ये साबित करने के लिए काफी है की रानी पद्मिनी स्थानीय लोगो के जनमानस ने पीढियो से बसी हुई है. इरफ़ान हबीब जैसा कोई इतिहासकार अगर वह जाने की कष्ट उठाए तोह लोकल गाइड उससे रानी पद्मिनी का महल दिखा देंगे. गाइड उन्हें वो जगह दिखा देंगे जहा रानी तब कड़ी हुई जब खिलजी ने उनकी झलक देखि. वो उन्हें वो स्थान भी दिखा देंगे जहा रानी ने अन्य वीर राजपुर महिलाओ के साथ जौहर किया.

बंगालदेश में रविन्द्रनाथ ठाकुर और शरत चाँद जैसे महान लेखको की रचनाओ की पाठ्यक्रम से केवल इसीलिए निकाला जा रहा है की वो हिन्दू है. उनपर आरोप लगाए जा रहे है की उनकी रचनाएँ हिन्दू को बढ़ावा देती है. क्या हबीब और जावेद अख्तर जैसे लोग कभी इसके खिलाफ भी जुबां खोलेंगे?

  • Distortion of History in Bollywood and Textbooks “Movie Padmavati Controversy”
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