जननी और जन्मभूमि का महत्व

जननी जन्मभूमिस्च स्वर्गादपि गरियसि-यानी जननी और जन्मभूमि का स्थान स्वर्ग से भी ऊँचा होता है। माँ अर्थात ममता, माँ से ही घर और परिवार, माँ ही जीवन देने वाली और जीवन को संभालने वाली, क्या जिस कोक से जन्मे उसके प्रति कोई ऋण नहीं! क्या ऋण सिर्फ उस माँ का जिसने पैदा किया?

हमारा राष्ट्र हमारे शरीर के समान है। यदी एक अंग कमजोर हो जाए तो उस अंग को काट नहीं देते अपितु उसका इलाज करते हैं। यही अन्तर है भारतीय सोच और साम्यवादी की सोच में।

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